Wednesday, 4 May 2011

MUJHE WAFA CHAHIYE

NA DUWA CHAHIYE NA DAWA CHAHIYE,

MUJHE TO GAON KI KHULI HAWA CHAHIYE.

NA DUSMNO KI KAMI HAI NA DOSTO KI KAMI,

MUJHE TO KISI APNE KI WAFA CHAHIYE.

3 comments:

हरकीरत ' हीर' said...

दवा , दुआ वफ़ा सब मिलेगी .....
जरा देवनागरी में लिखने की कोशिश तो करें .....

:))

संजय भास्कर said...

.... प्रशंसनीय रचना

संध्या शर्मा said...

न दुआ चाहिए न दवा चाहिए ,
मुझे तो गाँव की खुली हवा चाहिए .....
बहुत अच्छी रचना .... खुली हवा भी आजकल किस्मत से मिलती है..