Tuesday, 26 August 2014

मत बनना किसान

कहने को तो अन्नदाता है किसान। पूरी दुनिया का पेट भरता है किसान। हर कदम पर हर धर्म निभाता है किसान। बच्चो को अपने एक फोजी बनाता है किसान। सर्दी गर्मी वर्षा मोसम चाहे कुछ भी हो। दुनिया की दोड़ से अलग फसल उगाता है किसान। पर जब बात आती है किसान के अधिकारों की। तो भूल जाते हैं लोग की क्या बला है ये किसान। आधुनिकता के युग में हर महीने तनख्वाह पाते हैं लोग। अपना गन्ना बेचकर भी भुगतान नहीं पा रहा है किसान। कईं कईं साल की पेमेंट ये मिले रोक लेती हैं। लोग क्या जाने किस तरह उधारी में जीता है किसान। धरना पर्दर्शन कर जब भी अपना हक मांगने की कोशिस की। सरकार दमन करती है ऐसे जेसे कोई हैवान है किसान। जब चारो और से हो जाता है निराश और परेशान। तब कहीं जाकर आत्महत्या करता है कोई किसान। फिर भी सरकार के कानो पर जूं नहीं रेंगती। उपेक्षा के कारण आज तिल तिल मर रहा है किसान। ना तो ये नाम बचेगा ना बचेगा कोई निसान। एक दिन आएगा जब दुनिया से मिट जाएगा किसान। "अब जब भी कोई पूछता है मुझसे की क्या बनू बड़ा होकर? तब में एक ही बात बतलाता हूँ" की नेता बनना चाहे गुंडा बनना पर ना बनना तुम किसान। की नेता बनना चाहे गुंडा बनना पर ना बनना तुम किसान।

Saturday, 28 December 2013

रोज सोचता हूँ की तेरे पहलु में आकर रात गुजारूं पर कम्बखत मेरे मूल्क के हालत मुझे सोने नहीं देते बहुतो ने की कोसिस इस गुल को गुलजार करने की पर कुछ दॆश्द्रॊहि बिज प्यार के यहाँ बोने नहीं देते जाट गुज्जर पंडित छोड़कर हिन्दू कहलाने की कोसिस है पर ये सेकुलर कुत्ते हम हिन्दुवो एक होने नहीं देते रोज सोचता हूँ की तेरे पहलु में आकर रात गुजारूं पर कम्बखत मेरे मूल्क के हालत मुझे सोने नहीं देते निशांत बालियाँ ( साजन आवारा)

Friday, 13 December 2013

एक बार फिर से

आया हूँ आप लोगो से मिलने एक बार फिर से सोये हुये लोगों को जगाने एक बार फिर से बहुत दिनों से न कोई कविता न गजल न शायरी लिखी अपना हाल ऐ दिल सुनाने आया हूँ एक बार फिर से कुछ दोस्त जो मायूस थे इस आवारा की वापसी को लेकर उन दॉस्तो को हसाने आया हूँ एक बार फिर से और वो जिनको हुयी थी खुसी मेरे जाने को लेकर उनको भी सताने आया हूँ एक बार फिर से। जय हिन्द साजन आवारा

Wednesday, 22 August 2012

nari ki lachari

Dahej ki khatir jis ghar mein nari ka apmaan hai, jle jahan masoom jvani har ghar wo samsaan hai. Nirdhan ki beti ko milta jine ka adhikaar nahi, nyay ke thekedaro bolo kya ye atyaachar nahi? Stov fta bijli ne pakda kya ye jhuta parchar nahi? Jahar kha liya fansi le li, fhir bhi paya paar nahi. Padi sadak par sadti lhase, hoti unki pahchaan nahi............. Nayi nveli dulhan aayi, jivan ka bima karvaya, aang lga di ghar ke andar jinda bahu ko jlaya. Ghor yatnaye sahe vaha or duniya ko bimar btaye, narm bdan gram slakhe mili kam dahej mein sjaye. Majhab ke thekedaro bolo kyun band huyi jbaan hai? Jle jahan masoom jvani............. Dya dhram ke sodagar kahlate ho dani, chankar pani pine wale pi jate hain lahoo insaan. Sabji se bhi jyada sasti hai dahej ke karan jvani. Dahej na lane wali dulhan do din ki mehmaan hai, jale jahan masoom jvani har ghar wo shamsaan hai. Jai maa bharti

Monday, 21 November 2011

महबूब से आश

मेरे महबूब मेरी मोहबत का कुछ तो सिला दो ,
दो बातें प्यार की कर लो या जहर नफरत का पिला दो .
कोण हूँ में , तुम्हारा अपना या पराया ?
होंतो को न सीलो तुम कुछ तो बता दो .
मेरी वफाओं का कुछ अंजाम तो दो ,
या तो दिल में बसा लो या नजरों में गीरा दो.
लगता है अगर तुमको प्यार झुटा है मेरा ,
उबार न पाऊं कभी कुछ इसी सजा दो .
कुछ एहसान हमारे दिल को भी बख्सो ,
जो तुम्हारा दीवाना हो गया है .
तोड़ दो इसे खिलौना समझकर या अपने दिल से मिला दो .
जिन रास्तों पर चल रहा हूँ में मंजिल तुम्हे समझकर ,
सफ़र कम कर दो या रास्ता भुला दो .
एक अरसे से भूका प्यासा तुम्हे पाने की जीद पर हूँ ,
या तुम भी जिद्दी बन जाओ या अपना बना लो .
यूँ कब तक प्यार की नैया को अकेला चलाता रहूँगा ,
या तुम भी पतवार संभालो या मुझको डूबा दो ..




mere mahboob meri mohabat ka kuch to sila do,
do baaten pyaar ki kar lo ya jahar nafrat ka pila do.
kon hun mein, tumhara apna ya praya?
honto ko na seelo tum kuch to bata do.
meri wafaon ka kuch anjaam to do,
ya to dil me basa lo ya najron me geera do.
lagta hai agar tumko pyaar jhuta hai mera,
ubar na paun kabhi kuch esi saja do.
kuch ehsaan hamare dil o bhi bakhso,
jo tumhara diwana ho gaya hai.
tod do ise khilona samajhkar ya apne dil se mila do.
jin raston par chal raha hun me manjil tumhe samajhkar,
safar kam kar do ya rasta bhula do.
ek arse se bhuka pyasa tumhe pane ki jiid par hun,
ya tum bhi jiddi ban jao ya apna bana lo.
un kan tak pyaar ki neya ko akela chalata rahunga,
ya tum bhi bhi patwaar sambhalo ya mujhko dooba do..

Sunday, 6 November 2011

याराना

koi kahta hai awara koi kahe diwana hame,
na jane kon kahega kisi shama ka parwana hame.
dosto ne us gali ke chakkar par chakkar lagwa diye,
le ke dubega ek din ye yarana hame.


कोई कहता है आवारा कोई कहे दीवाना हमें ,
न जाने कोण कहेगा किसी शमा का परवाना हमें .
दोस्तों ने उस गली के चक्कर पर चक्कर लगवा दिए ,
ले के डूबेगा एक दिन ये याराना हमें

Monday, 17 October 2011

में ब्लोगर बन गया

सुन बेवफा तेरी मोहबत में में ,
क्या से क्या बन गया .
आकर देख ब्लॉग पर,
में भी ब्लोगेर बन गया.
तू कभी मेरी बात नहीं सुनती थी,
सपने मेने अकेले बुने तू नहीं बुनती थी.
तुझसे अच्चा यहाँ संसार मिला,
तुझ ज्यादा यहाँ प्यार मिला.
हर कोई यहाँ बातों को समझता है,
हर कोई यहाँ जज्बातों को समझता है.
तुने तो कभी मुझे अपना नहीं मन ,
यहाँ हर कोई मुझे अपना समझता है.
पहले मज़बूरी में शायरी की अब शोक बना लिया,
पहले तेरी यादों में डूबा रहता , अब तुझको भुला दिया.
भूल से ही सही एक दिन बलोग पर जरूर आना ,
क्यूँ की तुने बेवफाई मुझे जरूर बताना.
करता रहूँगा में शायरी जब तक जवाब नहीं मिलेगा,
ढून्ढ लेना पुरे जहाँ में मुझ जेसा ख्वाब नहीं मिलेगा...........साजन आवारा

Wednesday, 10 August 2011

aajadi ke parwano ki
tum sun lo aaj kahani.
mout ko gale lagakar unhone
bharat ki bachayi nishani.
sabne manayi diwali to
wo khele khun ki holi.
bharat ko dilwane aajadi
chali thi diwano ki toli.
parwane ko jese
shama se pyar ho jata hai.
janta hai marna hai phir bhi
shama ke pas wo jata hai.
aajadi ke diwano ki halat bhi
kuch esi thi .
aajadi to unki khatir
maa ke jesi thi
phir kon beta apni maa ko
bhul pata hai.
maa ko paane ko jaan ki
baaji lagata hai
sadharan sache, nadan the wo
wo the prem pujari.
pani jab sir se gujra
tab bane wo krantikari.
teis sal ka bhagat singh
tha bilkul nadan.
hanste hanste fhanshi jhula
liya mout ko tham.
rajguru,sukhdev ne bhi
di goron ko khub chunauti.
fanshi gale lagakar
phir de di apni aahuti.
raajput maharana partap ne bhi
khub naam kamaya tha.
chetak par hokar sawar
angrejon ko bhgaya tha.
ek din chetak ne jab
sath maharana ka chora.
baad uske maharana ne bhi
duniya se nata tora.
jhanshi ki rani ne bhi
rodar rup apnaya tha .
kabhi durga kabhi kali
kabhi chandi roop apnaya tha.
rani ne purushon ka
khub sath nibhaya tha.
kandhe se kandha milakar
aajadi ka deep jalaya tha.
sabarmati ke sant ne bhi
khub kamal kiya tha.
hinsha chor ahinsha ka
rasta bemishal diya tha.
Kabhi styagrah kabhi dandi march
kabhi ashyoog andolan kiya tha.
angrejo ke chakke chudaye
or rahna duswaar kiya tha.
e rastrpita hum tumko
kabhi na bhula payenge.
teri tasweer ko apne
seene me hamesha bsayenge.
maaf karna ham sabko
agar ho jaye koi nadani.
aajadi ke parwno ki tum
sun lo aaj tum kahani.
mout ko gale lagakar
bharat ki bachayi nishani.
e bharat ke logo
mat bhulna unki balidani.
bharat mata ke charno me
hai ye sabse badi kurbani.

बहुत दिनों से ब्लॉग से दूर रहा हूँ में किसी करनवास
इतने दिनों में मेने महसूस किया की कहीं कुछ छोर दिया है
मेने..
लेकिन अब में थोडा फ्री हुवा हूँ और ब्लॉग जगत को अपना
योगदान देने के लिए फिर से तियार hun


आजादी के परवानो की
तुम सुन लो आज कहानी.
मौत को गले लगाकर उन्होंने
भारत की बचायी निशानी .
सबने मनाई दिवाली तो
वो खेले खून की होली .
भारत को दिलवाने आजादी
चली थी दीवानों की टोली .
परवाने को जेसे
शमा से प्यार हो जाता है .
जiनता है मरना है फिर भी
शमा के पास वो जाता है .
आजादी के दीवानों की हालत भी
कुछ इसी थी .
आजादी तो उनकी खातिर
माँ के जेसी थी
फिर कोण बेटा अपनी माँ को
भूल पता है .
माँ को पाने को जान की
बाजी लगता है
साधारण सचे , नादाँ थे वो
वो थे प्रेम पुजारी .
पानी जब सर से गुजरा
तब बने वो क्रन्तिकारी .
तेईस साल का भगत सिंह
था बिलकुल नादाँ .
हँसते हँसते फ्हंशी झुला
लिया मौत को थम .
राजगुरु ,सुखदेव ने भी
दी गोरों को खूब चुनौती .
फंशी गले लगाकर
फिर दे दी अपनी आहुति .
राजपूत महाराणा परताप ने भी
खूब नाम कमाया था .
चेतक पर होकर स्वर
अंग्रेजों को भगाया था .
एक दिन चेतक ने जब
साथ महाराणा का चोर .
बाद उसके महाराणा ने भी
दुनिया से नाता तोरा .
झंशी की रानी ने भी
रोडर रूप अपनाया था .
कभी दुर्गा कभी कलि
कभी चंडी रूप अपनाया था .
रानी ने पुरुषों का
खूब साथ निभाया था .
कंधे से कन्धा मिलकर
आजादी का दीप जलाया था .
साबरमती के संत ने भी
खूब कमल किया था .
हिंशा छोर अहिन्षा का
रास्ता बेमिशाल दिया था .
कभी सत्याग्रह कभी डंडी मार्च
कभी अश्यूग आन्दोलन किया था .
अंग्रेजो के चक्के चुदाये
और रहना दुस्वार किया था .
ए रास्तेर्पिता हम तुमको
कभी न भुला पाएंगे .
तेरी तस्वीर को अपने
सीने में हमेशा बसायेंगे .
माफ़ करना हमें सबको
अगर हो जाये कोई नादानी .
आजादी के पर्व्नो की तुम
सुन लो आज तुम कहानी .
मौत को गले लगाकर
भारत की बचायी निशानी .
ए भारत के लोगो
मत भूलना उनकी बलिदानी .
भारत माता के चरणों में
है ये सबसे बड़ी क़ुरबानी .

जय हिंद जय भारत

Tuesday, 2 August 2011

फोजी की छुट्टी

1 ये फौजी निकल चुका है अपने घर के लिए ,
अपने परिवार से अरसे बाद मिलने के लिए .
माँ भी कब से इन्तजार कर रही है मेरा ,
अब रुकना कठिन है मेरे लिय्रे .
जरुरी नहीं की हर होली ,दीवली पर मैं घर पर हूँ ,
जब मैं घर पर हूँ तभी होली दीवली है मेरे लिए .
2 कितना खुशी का आलम होगा ,
जब ये फौजी घर पर होगा .
माँ मिलेगी तो गले से लगाएगी ,
फिर उसकी भी रुलाई फूट जाएगी .
कहेगी , इतने दिनों बाद क्यूँ आता है ?
क्या एक बार भी हमारा ध्यान नहीं आता है ?

फिर ये फौजी भी भावुक हो जायेगा ,
माँ के गले लग जायेगा .....
3 फिर से कई यादे ताज़ा हो जाएँगी ,
दोस्तों की भरमार भी ज्यादा हो जाएगी .
फिर वही मटरगस्ती का खेल शुरु होगा ,
घर पर आकर फिर धामा चौकड़ी भी जरुर होगी .
में फौजी नौजवान हूँ हट्टा कट्टा हूँ ,
पर माता पिता के लिए अभी बच्चा हूँ .
4 फिर जैसे जैसे छुट्टियाँ खत्म होंगी ,
दूर जाने के गम फिर आँखे नम होंगी .
सामान के साथ माँ ढेर सरे लड्डू बांध देगी ,
जाते जाते फिर से एक सीख देगी ,
कि सफ़र में किसी अंजान के हाथों से मत खाना ,
और अगली बार बेटा कमज़ोर होकर मत आना ..|

Saturday, 23 July 2011

ये क्या हो रहा है

आज का इंसान अपनी जिन्दगी बस यूँ ही ढो रहा है
जागेगा ये कब जो अभी सो रहा है.
बन गए ये कितने बेरहम ?
क्या कोई संवेदना बची ही नहीं ?
भारत आज अपनी सभ्यता KE ITIHAS KO खो रहा है ?
कहीं सोते लोगो पर लाठी भंजती है ,
कहीं नारी की अस्मत लुटती है
गाँधी के देश में आखिर ये क्या हो रहा है ?
जुर्म और कानून का खेल भी निराला हो रहा है ,
जुर्म कर मुजरिम खुले घुमते है और
देखो ये कानून सो रहा है
पड़ोसियों पर भी हम अब
विश्वास कैसे करे
दोस्ती की आड़ में वो देखो
आंतक के बीज बो रहा है----------
JAI HIND JAI BHARAT..





ANU MAM KA SUKRIYA ADA KARNA CHAHUNGA KYUNKI
MERI POST KO UNHONE HINDI ME TYPE KIYA HAI..

ASAL ME MUJHE COMPUTER KE BARE ME JYDA JANKARI NAHI HAI,
MA TO BAS APNE MOBILE SE HI BLOGING KAR LETA HUN OR
MOBILE SE HINDI ME TYPE KARNE ME PROB HOTI HAI ,TAHA CAFE ME JANE KA
TIME NAHI MIL PATA. BUS ME ANU MAM
KO APNI POST BEH DETA HUN OR WO TRANSLATE KAR DETI HAI.....

Saturday, 16 July 2011

मेरा JANAMDIN

15 जुलाई को WAYAST के करन ME YE पोस्ट सान
डाल SAKA, isliye YE RACHA ME
आज पोस्ट कर रहा हुन.



आज का दीन HMARE लिए कुछ खास HAI,
आज JANMDIN हाई हमारा बस YAHI बात है.
आज हम भी 22 WARAS के हो गए,
बचपन पिचे CHHUT गया हम JWAN हो गए.
कुछ सपने SANJOYE है, कुछ KAAMO को HAI पुरा karna.
हां खुदा HAR PARISTHITI ME JINE की हिम्मत MUJHME BHARNA.
DEKHUN भारत को DOBARA सोन की CHIDIYA BANTE हुए,
DOSTO तुम भी भारत के लिये YAHI DUWA karna.
मिला है मुझे YAHAN बहुत सारा प्यार,
DOSTO मुझसे तुम कभी NA karna TAKRAR.

Sunday, 22 May 2011

USKI DOLI KHUD SAJA KE AAYA HUN.

PK शर्मा भाई का सुक्रिया अदा करना चाहूँगा क्यूंकि उन्होंने कहा है की वो मेरी रचनाओ को हिंदी में तब्दील कर दिया करेंगे.. PK भाई मेरी मदद करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद ..
यहाँ पर जो प्यार मिल रहा है मुझे बहुत अछा लग रहा है .
( यहाँ आप लोगो से बहुत कुछ सीखूंगा.
अंधेरो में भी उजाले की तरह दिखूंगा .
ये मत समझना की वक्त के साथ नहीं चलूँगा,
जब तक सांस है तब तक लिखूंगा )

अब पेस है एक नयी रचना...

कदम लडखडा रहे हैं पर में होश में हूँ ,
ये मत समझना की चढ़ा के आया हूँ .
अरे में तो अपनी बर्बादी के जश्न में ,
सब महफील सजा के आया हूँ .
मेरे चाहने वालो की कमी नहीं है,
में तो एक सखस को भुला के आया हूँ .
भूले से भी याद न आ जाये उस बेवफा की ,
तमाम यादों को उसकी में आज जला के आया हूँ .
मेरे दर्द को ज़माने की हवा न लगे,
में तो अपने जख्मो को छुपा के आया हूँ .
इससे ज्यादा बेबसी और क्या होगी,
उसकी डोली को खुद में सजा के आया हूँ .
एक तस्वीर ही है मेरी आँखों में उसकी ,
कोई देख न ले इसलिए नजरे झुका के आया हूँ .

Saturday, 21 May 2011

Humse puchiye

Sisakti hui jindgi ka maja humse puchiye. Pyaar me jo mili saja humse puchiye. Kyun ho aap udaas gum ki talaas me. Gum ki har gali ka pta humse puchiye.

Friday, 20 May 2011

SAJAN VS SITARA

BUS EK KHATA MENE KI UNSE PYAAR KARNE KI.
OR UNHONE SAJA DI KABHI NA DIDAAR KARNE KI.
SOCHTA HUN KYA ME RAH PAUNGA BINA USKE PYAR KE.
MOUT BHI NAHI AAYEGI BINA USKE DIDAAR KE.

Monday, 16 May 2011

BEBSEE

BEPNAH ISK DBAYE BETHA THA IS DIL ME,
PAR USSE IJHAR NA KAR SKA.
USKI HAR BAAT MANNA MAJBURI THI MERI,
PAR USSE WADE HJAAR NA KAR SKA.
FIKR LAGI RAHTI THI HAR WAKT USI KI,
OR APNA KOI SAPNA SAKAR NA KAR SKA.
MERI AANKHE UN HI BRASTI RAHI UNKI YAAD ME,
PAR IN AANKHO SE UNKA DIDAAR NA KAR SKA. . .

Monday, 9 May 2011

YE KESA NASEEB HAI?

MERI JINDGI KI KAHANI BHI KUCH AJEEB HAI।
HO CHUKE SAB JAJBAAT MURDAA, PAR YAADEN SAJEEV HAIN।
MERE DIL KE ARMAANO ME JAB SE AANG LAGI HAI,
KHUSIYAN HO CHUKI JALKAR KHAK BUS GUM HI KAREEB HAIN।
JAB TAK SATH USKA THA, DUNIYA NAHI DEKHI THI।
AB BAN CHUKA ME AWARA, YE KESA NASEE HAI?





Saturday, 7 May 2011

KHUDA SE DARTA HUN

SAATH CHHODUNGA NA TERA YE WADA KARTA HUN।
PYAAR TUJHSE KARTA HUN OR TUJHPE HI MARTA HUN।
MAT SOCH KI BEWAFAI KRUNGA KABHI,
INSAAN HUN ME BHI , KHUDA SE DARTA HUN।



Thursday, 5 May 2011

NARI KA BLAT_ _ _R

HE NAR KYUN NARI KO TUM ITNA STATE HO?
HAVAS ME ANDHE HOKAR HEWAAN KYUN BAN JAATE HO?
KYUN KARTE HO TUM NARI PAR ATYAACHAR?
KYUN KARTE HO TUM ISKA BLAT_ _ _R?
JISNE TUMKO PALA POSA JISNE TUMKO GYAN DIYA,
USI NARI KA PHIR TUMNE KYUN APMAAN KIYA?
ISNE TUMKO BDAA KIYA ISNE TUMKO NAAM DIYA,
KYUN PHIR TUMNE ISAKO NA UCHIT SAMMAAN DIYA?
RAAVAN NE BHI EK NARI KI IJJAT PAR HATH DALA THA,
PHIR BHAGWAAN RAM NE USKO MAAR DALA THA
AGAR SHOK HAI TUMKO BHI MARNE KA,
TO JAHAR KHAKAR MAR JAO
PAR KISI NARI KO TUM UN NA TADPHAO।
KISI NARI KO CHEDNE KI AGAR DIMAG ME BAAT AAYI HO,

TO USSE PAHLE YE SOCHO KI TUM BHI EK MAA KE BETE
OR BAHAN KE BHAI HO।
NARI KOI VASTU NAHI JISKO BHOGA JATA HAI,
YE TO WO DEVI HAI JISKO PUJA JATA HAI।
KAH RAHA HAI AAJ TUMKO YE NISHANT BALIYAN,

KROGE AGAR TUM INKA BHLA TO HOGA TUMHARA BHI KALYAAN...

(ME MAFI CHAHUNGA HINDI ME NA LIKHNE KE KARAN, KYUNKI ME AIR FORCE ME HUN OR ASSAM ME ESI JAGHA PAR POSTING HUN JAHA PAR CAFE KI SUVIDHA NAHI HAI OR TIME BHI NAHI MILTA। TO ME APNE MOBILE PAR HI KARTA HUN)


Wednesday, 4 May 2011

SAJAN KA PYAR

MENE KYA MANGA THA TUMSE, EK WAFA HI TO MANGI THI.
PHIR KYUN TUMNE MERA DIL JLAYA?
BEWAFAI TUMNE KI OR DIL MERA TOD DALA.
YE KON SA INSAAF HAI?
MANA KI ME TERE KABIL NA THA,
PAR ISME MERE DIL KA KSUR NA THA.
YE BECHARA TO MASUM HAI, NADAN HAI.
EK BAR TOT GYA TO KON ISE MNAYEGA?
KYA TUMHE EK BAR BHI ISKA KHYAL AAYA NA THA?
TUM AMIR HO ME GREEB HUN, KYA YAHI MERI KHTA HAI?
AGAR MERI YAHI KHTA HAI TO MUJHSE PYAR KYUN KIYA?
CHLO AGAR PYAR KIYA TO BAD ME INKAR KYUN KIYA?
KYA PYAR ME BHI NAP TOL CHALTI HAI KI TUM AMIR ME GREEB?
KYA AMEER HI PYAR KAR SAKTE HAI,
GREEBON KO PYAR KARNE KA HAK NAHI HAI?
KUCH TO BOLO KUCH TO KAHO.
KYA GREEB LOGO SE BAAT KARNA BHI PSAND NAHI RAHA?
PHIR PYAR KI BAATEN KYUN SIKHAYI THI MUJHKO?
ME TO THA AWARA. . . AWARA SAJAN.
TUMNE HI TO MUJHE PYAR SIKHAYA.
PYAR KE TMAAM SPNE DIKHAYE.
AB KYA HUA KHA GYE WO SPNE?
KYUN TOD DALE WO SPNE?
KYA MUJHKO SAPNE DEKHNE KA HAK BHI NAHI?
MENE TO HUMESA WAFA KI. TUMHARA KHYAL RAKHA.
TUMKO CHUNE SE BHI ME DARTA THA,
KAHI TUMKO IS GREEB KE HATO KA NISAN NA PAD JAYE.
KYA MENE KUCH GALAT KIYA?
TUMSE MILNE KE BAD ME BHUL GYA THA KI ME GAREEB HUN.
PAR TUMNE AAJ PHIR MUJHE MERE GAREEB HONE KA AHSAAS KRA DIYA.
JAHA SE TUM MUJHE LAYI THI MUJHE WAPAS WAHI PAR PAHUCHA DIYA,
NAHI SAYAD USSE BHI PARE.KYUNKI PAHLE TO ME SIRF ME GAREEB THA,
PAR AB DIL BHI TUT CHUKA HAI.
YE SAJAN BHI TUT CHUKA HAI.
MERA YE AWARA PAN AB SHAYAD DEKHNE KO NAHI MILEGA,
KYUNKI TUTE DIL KE SATH SAJAN KAB TAK JIYEGA?

MUJHE WAFA CHAHIYE

NA DUWA CHAHIYE NA DAWA CHAHIYE,

MUJHE TO GAON KI KHULI HAWA CHAHIYE.

NA DUSMNO KI KAMI HAI NA DOSTO KI KAMI,

MUJHE TO KISI APNE KI WAFA CHAHIYE.

Sunday, 1 May 2011

ADAON KA ASAR

MERA DIL NADAN KUCH IS KADAR THA,

WO KHELE KHILONA SAMJHKAR
OR
YE BEKHABAR THA.

BDE SAATIR THE WO ,

PAR YE DIL SAMJH NA PAYA.

SHAYAD UNKI ADAON KA KUCH ASAR THA.

NARI KA APMAAN

KYA KHTA KI NARI NE, KYUN BNA NAR HEWAAN ?

KYUN HO RAHA HAI PHIR BHARAT ME NARI KA APMAAN ?

KYUN BHULTE HO TUM, TUMHE BHI NARI NE JANAM DIYA HAI.

PET APNA KAT KATKAR TUMHARA PET BHRA HAI.

KUCH TO YAAD KARO TUM, US NARI KA AHSAAN.

JAB BHI CHOT LAGI TUMKO, LIYA US NARI NE THAM.

NO MAHINO KI PIDA SAHKAR USNE, TUMKO JANAM DIYA HAI.

JAB BHI TUMKO DHUNP LAGI,TAB HI SIR PAR AANCHAL KIYA HAI.

JIS DEVI KI PUJA KARTE HO WO BHI TO EK NARI HAI.

WO SHAKTI KI DEVI HAI, YE ORAT BECHARI HAI.

NARI APNE MATHE PAR SINDUR KYUN LAGATI HAI ?

KYUNKI WO APNE SUHAG KI HARDUM SALAMTI CHAHTI HAI.

PHIR KYUN US NARI KO ITNA STAYA JATA HAI ?

DAHEJ NA MILNE PAR KYUN USE JLAYA JATA HAI ?

JIS DES ME NAHI MILTA NARI KO SAMMAN ,

WO DES BAN JATA HAI NISCHIT HI SHAMSHAN.

Saturday, 30 April 2011

APNE RUTH GYE

MERI AANKHO ME JO SAPNE THE WO TUT GYE.

KE SAB BANDHAN EK PAL ME CHHUT GYE.

YAHA NA KOI KISI KA HAI OR NA HOGA.

PRAYON KI KYA BAAT KARE JAB APNE HI RUTH GYE.

Friday, 29 April 2011

NISHAN AAJ BHI BAKI HAI

DIL KI DHADKANO ME TAMNNAYEN AAJ BHI BAAKI HAIN.

MERE JEHAN ME KUCH YAADEN AAJ BHI BAAKI HAIN.

KADAM SE KADAM MILAKAR CHALA THA ME JIN RAHON PAR

UNKE SATH, WO RAHEN VIRAAN HO GAYI

PAR NISHAN AAJ BHI BAAKI HAIN.

Wednesday, 27 April 2011

WAFA KE DAMAN ME DAAG

RAAT KO HI CHAND KA DIDAAR KYUN HOTA HAI.

KISI BEWFA SE HI HUMKO PYAAR KYUN HOTA HAI.

KOI KASAM DE DETA HAI APNE BHUL JANE KI,

PAR BHULNE KE BAAD BHI DIL BEKRAAR KYUN HOTA HAI.

WAFA HUM NIBHATE HAIN, BEWFAI WO KARTE HAIN.

PHIR HMARE DAMAN ME DAAG OR UNKA DAMAN BEDAG KYUN HOTA HAI.

Tuesday, 26 April 2011

Bahadur foji

Himalya ki bulandi se hum dra nahi karte.

Jamee gir jaye, kam esa kiya nahi karte.

Foji he hum aage bdhte jayenge.

Aage bdhakar kadam piche hum aaya nahi karte.

Kaat kar paharon ko hum raste khud bnate hain.

Takdir par bhrosa hum kiya nahi karte.

Hosh bhi hum me hai josh bhi khub hai.

Josh me aakar hosh hum khoya nahi karte.

Mout se to apna nata purana hai.

Samne dekh mout ko hum ghabraya nahi karte.

Sunday, 24 April 2011

Bekrari

Itni bekrari na thi hume kabhi jindgi me.

Kyonki mohabat hi na ki thi humne kabhi jindgi me.

Ab dil me becheni is kadar hoti hai, ki me jagta hun or duniya soti hai.

Thursday, 21 April 2011

MEHNDI KI MAHAK

MERI AANKHO ME MOHBBAT KI CHAMAK AAJ BHI BAKI HAI,

MERI MOHABBAT PAR UNHE SHAK AAJ BHI BAKI HAI.

BETHKAR DHOYE THE NAAV ME KABHI HATH USNE APNE,

TALAB KE PANI ME MEHANDI KI MAHAK AAJ BHI BAKI HAI. JAI BHARAT

Thursday, 7 April 2011

BACHPAN MEIN

WO HE RAHEN THI WO HI KHET THE, MEIN

GHUMA KARTA THA JINPAR BACHPAN MEIN.

WO SARSON KE PHUL PAR BETHI TEETLI,

WO BHANWRE KA KALIYON PAR MANDRANA,

YAHI TO DEKHA KARTA THA ME BACHPAN MEIN.

WO MAA KE HATHO KI ROTI ,

WO RARSON KA SAAG BANANA.

DADI KE HATHO KE LADDU,

OR PAPA KA JAMUN LANA,

YAHI TO HOTA THA BACHPAN MEIN.

WO BEECH GAON MEIN ROJ SHAM KO,

BARGAD KE NICHE CHOPAL LAGANA,

PHIR DADA JI KE CHUTKULEN

OR PAPA JI KA GANA GANA,

YAHI TO HOTA THA BACHPAN MEIN.